संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज के नेतृत्व में निकली यात्रा का भव्य स्वागत, साधना और आध्यात्मिक जागरण का दिया संदेश
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। कन्याकुमारी से कश्मीर तक आध्यात्मिक चेतना और स्वर्वेद के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से निकली राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद संदेश यात्रा काशी पहुंची। संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में विभिन्न राज्यों से होकर पहुंची यात्रा का स्वर्वेद महामंदिर धाम में विहंगम योग के अनुयायियों ने भव्य स्वागत किया।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज ने कहा कि सच्ची शांति बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि शांत और निर्मल अंतःकरण में निहित है। उन्होंने कहा कि मनुष्य के विचार ही उसके जीवन की दिशा तय करते हैं। ध्यान और साधना के माध्यम से चेतना जागृत होने तथा अंतःकरण के निर्मल होने पर विचारों में शुद्धता, वाणी में मधुरता, व्यवहार में करुणा और कर्मों में सेवाभाव स्वतः विकसित होने लगता है।
आयोजकों के अनुसार, स्वर्वेद संदेश यात्रा के दौरान विभिन्न राज्यों और जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक जागरण के साथ आगामी 14 एवं 15 दिसंबर को आयोजित होने वाले विहंगम योग संत समाज के 103वें वार्षिकोत्सव, समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव एवं 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ में अधिक से अधिक सहभागिता के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
यात्रा की शुरुआत 18 जुलाई 2026 को कन्याकुमारी से हुई थी। दक्षिण भारत से आगे बढ़ते हुए यात्रा तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित कई राज्यों से गुजरी। इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ होते हुए यात्रा उत्तर प्रदेश पहुंची।
काशी पहुंचने के बाद यात्रा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से होते हुए दिल्ली-एनसीआर जाएगी। इसके बाद यात्रा का अगला पड़ाव कश्मीर होगा। आयोजकों ने बताया कि यात्रा के माध्यम से लोगों को आगामी महाआयोजन से सेवा, संकल्प और सहभागिता के भाव के साथ जुड़ने का आह्वान किया जा रहा है।




