गीता का ज्ञान सर्वकालिक और सर्वदेशीय : राष्ट्रीय वेबिनार में विद्वानों के विचार
वाराणसी। श्रीमद्भगवद्गीता एक ऐसा दर्शन है, जो हर युग और हर देश में मानव जीवन के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह विचार शनिवार की शाम प्रोफेसर बीएन जुयाल एजुकेशनल फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित “वर्तमान समय में श्रीमद्भगवद्गीता की प्रासंगिकता” विषयक राष्ट्रीय वेबिनार में विभिन्न शिक्षाविदों और विद्वानों ने व्यक्त किए।
ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. अंबिका प्रसाद गौड़ ने स्वागत करते हुए कहा कि गीता का ज्ञान सर्वकालिक और सर्वदेशीय है। विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार डॉ. अत्रि भारद्वाज ने गीता को सभी कालों और सम्पूर्ण विश्व के लिए उपादेय बताया।
मुंबई से जुड़े सिने इतिहासवेत्ता डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने गीता को व्यक्तिगत विकास और आध्यात्मिक शांति का मार्गदर्शन बताया। डॉ. रामविनय सिंह (देहरादून) ने गीता के कर्मयोग और निष्काम कर्म के सिद्धांतों को तनावमुक्त जीवन का संदेश बताया। दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय की डॉ. विदुषी आमेटा ने गीता को नैतिक दुविधाओं से उबारने वाला ग्रंथ कहा, जबकि प्रो. ऋचा मिश्रा (छपरा) ने जीवन के मूलभूत सिद्धांतों की व्याख्या में इसकी उपयोगिता रेखांकित की।
उच्च न्यायालय प्रयागराज के अधिवक्ता अजीत सिंह ने कहा कि गीता का उपदेश केवल व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि समस्त मानव जाति के कल्याण का संदेश देता है।





