अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बताया स्वयं को अक्षम, उच्च न्यायालय में ले जाया जाएगा मामला – अधिवक्ता विकास तिवारी
रिपोर्ट अभिषेक उपाध्याय
जौनपुर। जनपद में प्रतिबंधित चाइनीज/नायलॉन/सिंथेटिक मांझा, प्लास्टिक तात धागा एवं सीसा लेपित धागे की बिक्री, भंडारण और उपयोग के विरुद्ध दायर सार्वजनिक हित से जुड़ा आवेदन माननीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम, जौनपुर द्वारा तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया गया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उक्त आवेदन में माननीय राज्यपाल एवं जिला मजिस्ट्रेट, जौनपुर को भी पक्षकार बनाया गया है, जबकि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम इस प्रकार के प्रकरण की सुनवाई के लिए सक्षम नहीं हैं। इसी कारण आवेदन को बनाए रखने योग्य नहीं माना गया। साथ ही न्यायालय ने आवेदक को यह छूट दी कि वह सक्षम न्यायालय अथवा उपयुक्त फोरम में पुनः आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।
यह आवेदन ग्राम कोड्डा, थाना जफराबाद, जौनपुर निवासी आशीष शुक्ल द्वारा दायर किया गया था। आवेदन का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन तथा पशु-पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। आवेदक द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों, सरकारी ज्ञापनों, समाचार पत्रों की कटिंग्स एवं स्थानीय सर्वेक्षण को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया था। यह याचिका भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) एवं अनुच्छेद 51क (घ) (पर्यावरण संरक्षण का मौलिक कर्तव्य) से प्रेरित बताई गई।
मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विकास तिवारी ने कहा कि न्यायालय का आदेश केवल तकनीकी आधार पर है, न कि विषयवस्तु पर। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित मांझे से हो रही मौतें और गंभीर दुर्घटनाएं आज भी जारी हैं। शीघ्र ही इस मामले को उच्च न्यायालय या अन्य सक्षम फोरम में पुनः प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि घातक मांझे पर प्रभावी और स्थायी रोक सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि जौनपुर में हाल के दिनों में चाइनीज मांझे से कई दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें एक स्कूल शिक्षक की मौत भी शामिल है, जिनकी गर्दन मांझे से कट गई थी। इस संबंध में पुलिस से कई बार मांग की जा चुकी है कि मांझा बेचने व उपयोग करने वालों के विरुद्ध हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने वर्ष 2017 में ही सिंथेटिक एवं नायलॉन मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण मकर संक्रांति जैसे पर्वों पर दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे मनुष्यों के साथ-साथ पशु और पक्षियों की जान जा रही है।
आवेदक आशीष शुक्ल ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और उपयोग पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और इस जनघातक प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए।





