भाजपा नेता प्रिंस चौबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र, उच्च शिक्षा में भ्रम और असंतुलन की जताई आशंका
हरहुआ (वाराणसी)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अधिसूचित UGC (Equity Promotion Regulations), 2026 को लेकर देशभर में उठ रही चिंताओं के बीच हरहुआ, वाराणसी से भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इन नियमों पर पुनर्विचार की मांग की है।
भाजपा किसान मोर्चा के जिला मंत्री एवं अधिवक्ता प्रिंस चौबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में कहा है कि समानता और भेदभाव समाप्त करने के उद्देश्य से लाए गए ये नियम अपने वर्तमान स्वरूप में उच्च शिक्षा संस्थानों में भ्रम, भय और असंतुलन उत्पन्न कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि नियमों में प्रयुक्त परिभाषाएं अत्यधिक व्यापक और अस्पष्ट हैं, जिससे शिक्षक, छात्र और शैक्षणिक प्रशासन असमंजस की स्थिति में आ गए हैं।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि भेदभाव की परिभाषा इतनी विस्तृत कर दी गई है कि अकादमिक मूल्यांकन, मेरिट आधारित निर्णय, अंक निर्धारण, शोध गुणवत्ता और अनुशासनात्मक कार्रवाई तक इसके दायरे में आ सकती है। इससे अकादमिक स्वतंत्रता प्रभावित होने के साथ-साथ उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
प्रिंस चौबे ने यह भी चिंता जताई कि नियमों में झूठी अथवा दुर्भावनापूर्ण शिकायतों को रोकने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है, जबकि कठोर दंडात्मक प्रावधान सीधे संस्थानों और छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। डिग्री कार्यक्रम रोकने, ऑनलाइन या डिस्टेंस शिक्षा बंद करने तथा संस्थानों को सूची से हटाने जैसे प्रावधानों को उन्होंने अत्यधिक कठोर बताया।
पत्र में सुझाव दिया गया है कि या तो इन नियमों को वर्तमान स्वरूप में निरस्त किया जाए अथवा आवश्यक संशोधनों के साथ पुनः लागू किया जाए। इसमें भेदभाव की परिभाषा को सीमित करने, सभी वर्गों के लिए समान संरक्षण सुनिश्चित करने, पारदर्शी सुनवाई प्रक्रिया तय करने तथा सुधारात्मक (ग्रेडेड) दंड व्यवस्था लागू करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
भाजपा नेता ने विश्वास जताया है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार शिक्षा में सामाजिक न्याय के साथ-साथ निष्पक्षता, संतुलन और संवैधानिक समानता को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर न्यायोचित और संतुलित निर्णय लेगी।





