डिस्क्रिमिनेशन नियमों पर रोक को बताया समाजहित में महत्वपूर्ण कदम, 19 मार्च को अगली सुनवाई
वाराणसी। यूजीसी 2026 के कथित भेदभाव संबंधी नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय का अंतर्राष्ट्रीय हिंदू महासभा ने स्वागत किया है। महासभा के राष्ट्रीय सचिव संपूर्णा नन्द पांडेय ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाकर समाज और शिक्षा व्यवस्था के हित में सराहनीय पहल की है।
संपूर्णा नन्द पांडेय ने बताया कि सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इन नियमों की भाषा को अस्पष्ट बताया है तथा इनके दुरुपयोग की संभावना पर भी चिंता जताई है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 मार्च की तिथि निर्धारित की है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के 75 वर्ष बाद भी समाज को पूरी तरह जातिगत भेदभाव से मुक्त नहीं किया जा सका है और ऐसे में इस प्रकार के कानून समाज को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे ले जाने वाले सिद्ध हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर पहले ही अनुभवी कानूनविदों की समिति बनाकर गहन विचार किया जाना चाहिए था। यह कार्य सरकार को करना चाहिए था, लेकिन अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप कर आवश्यक संतुलन स्थापित किया है।
अंतर्राष्ट्रीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय सचिव ने इस निर्णय को सवर्ण समाज और हिंदू एकता की जीत बताते हुए आशा व्यक्त की कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर सोच-समझकर और न्यायसंगत निर्णय लेगी।





