अचलानन्द महाराज ने चौपाई के भावार्थ से समझाया भक्ति, सेवा और समर्पण का मर्म
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। श्रीराम कथा के षष्ठम दिवस पर पंचवटी से पधारे कथा व्यास अचलानन्द महाराज ने केवट प्रसंग की अत्यंत भावपूर्ण और मार्मिक व्याख्या प्रस्तुत की। कथा के दौरान “मागी नाव न केवट आना, कहइ तुम्हार मरम मय जाना” चौपाई के भावार्थ को विस्तार से समझाते हुए उन्होंने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कथा व्यास ने बताया कि यदि श्रीराम केवट से सीधे कहते तो वह तत्काल चरण धोने को तत्पर हो जाता, किंतु “चितइ जानकी लखन तन” का भाव यह दर्शाता है कि प्रभु का एक चरण लक्ष्मण और दूसरा माता सीता के अधिकार में था। ऐसे में केवट को एक-एक चरण की सेवा कर संतोष करना पड़ा। उन्होंने कहा कि आज का केवट दोनों चरणों को दांव पर लगाकर बैठा है और कहता है— “बिना पग धोये नाथ नैया न चढ़ैहों।” इसी भाव में लक्ष्मण और माता सीता की ओर देखकर श्रीराम का मुस्कुराना मानो उनकी इच्छा जानने का संकेत था।
कथा के दौरान मोहन तिवारी, परमानंद एवं नरेंद्र द्वारा वाद्य यंत्रों की मधुर संगत पर “फिर तेरे चरणों का मैं हूँ गुलाम, मेरे अलबेले राम” भजन प्रस्तुत किया गया, जिससे पूरा पंडाल भक्ति रस में झूम उठा।
कथा के समापन पर आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन में सत्यम, शिवम, सुंदरम् मिश्रा परिवार सहित क्षेत्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।





