हितों की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश, कमीशन बढ़ोतरी की मांग तेज
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तुत हालिया केन्द्रीय बजट से देशभर के राशन डीलरों में भारी निराशा व्याप्त है। बजट में राशन डीलरों से जुड़ी समस्याओं और मांगों को नजरअंदाज किए जाने से देश के लगभग 5 लाख 38 हजार राशन डीलरों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
आल इंडिया फेयर प्राइज शॉप डीलर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गिरीश तिवारी ने कहा कि देश की लगभग 80 करोड़ गरीब आबादी तक सरकारी खाद्यान्न पहुंचाने की जिम्मेदारी राशन डीलर निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार उनकी कठिनाइयों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
उन्होंने बताया कि कोरोना काल में जब लोग एक-दूसरे के संपर्क में आने से भी डर रहे थे, उस समय राशन डीलरों ने अपनी और अपने परिवार की जान जोखिम में डालकर माह में दो-दो बार ई-पॉस मशीन के माध्यम से खाद्यान्न का वितरण किया।
गिरीश तिवारी ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान सरकार खाद्यान्न वितरण को बड़ा मुद्दा बनाकर जनता से वोट मांगती है। बीते उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करीब 16 प्रतिशत मत इसी मुद्दे से प्रभावित रहे, इसके बावजूद राशन डीलरों की लगातार उपेक्षा की जा रही है।
बताया गया कि उत्तर प्रदेश में 28 जनवरी से कोटेदारों द्वारा लखनऊ में कमीशन बढ़ोतरी को लेकर धरना-प्रदर्शन जारी है। वर्तमान में प्रदेश में राशन डीलरों को मात्र 90 रुपये प्रति कुंतल लाभांश दिया जा रहा है, जबकि कई अन्य राज्यों में यह 200 रुपये प्रति कुंतल या उससे अधिक है।
गिरीश तिवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उत्तर प्रदेश सरकार शीघ्र ही 200 रुपये प्रति कुंतल कमीशन की घोषणा नहीं करती है, तो आने वाले विधानसभा चुनावों में प्रदेश के 80 हजार कोटेदारों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रदेशभर के राशन डीलर सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।





