बीएचयू में व्याख्यान, हृदय रोग उपचार की नई दिशा पर प्रकाश
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग में आयोजित व्याख्यान में कनाडा की वेस्टर्न यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ कृष्णा सिंह ने रक्त वाहिकाओं की सेहत बनाए रखने में ऑटोफैगी की भूमिका पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि ऑटोफैगी एक प्राकृतिक कोशिकीय प्रक्रिया है, जो क्षतिग्रस्त घटकों को हटाकर एंडोथेलियल कोशिकाओं को स्वस्थ रखती है। ऑटोफैगी में बाधा आने पर फाइब्रोसिस और एथेरोस्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डॉ सिंह ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ रक्त वाहिकाओं में होने वाले बदलाव हृदय रोगों का कारण बनते हैं।
उन्होंने एटीजी-7 जीन से जुड़े शोध और पशु मॉडलों के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि ऑटोफैगी को बढ़ावा देकर हृदय एवं फाइब्रोटिक रोगों के इलाज की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।
काशी में जन्मी डॉ कृष्णा सिंह जर्मनी की हनोवर मेडिकल स्कूल से पीएचडी कर चुकी हैं और वर्तमान में वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में कार्यरत हैं। उन्हें अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन सहित कई संस्थानों से सम्मान और शोध अनुदान प्राप्त हो चुके हैं।




