तीन दिन की बैठक के बाद निर्णय, सभी अदालतें एक ही परिसर में लाने की मांग
वाराणसी। कचहरी विस्तार और विस्थापन के मुद्दे पर अधिवक्ताओं के बीच बड़ी सहमति बन गई है। सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मुरलीधर सिंह और पूर्व महामंत्री सुरेन्द्र पाण्डेय के आह्वान पर हुई तीन दिवसीय आमसभा में निर्णय लिया गया कि कचहरी का विस्तार केवल सेंट्रल जेल की भूमि पर किया जाए और सभी न्यायालयों को एकीकृत परिसर में स्थापित किया जाए।
बैठक में अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में दीवानी न्यायालय और कलेक्ट्रेट परिसर अलग-अलग होने से अधिवक्ताओं व वादकारियों को भारी परेशानी होती है। इसलिए दीवानी, कलेक्ट्रेट और चकबंदी सहित सभी अदालतों को एक ही स्थान पर स्थापित करने की सर्वसम्मति बनी।
अधिवक्ताओं ने कहा कि देश व प्रदेश में अब एकीकृत न्यायालय परिसर की नीति लागू की जा रही है। इसी क्रम में चंदौली में 17 जनवरी 2026 को भूमि पूजन भी हो चुका है, इसलिए वाराणसी में भी उसी मॉडल पर सेंट्रल जेल की भूमि पर न्यायालय परिसर विकसित किया जाए। नए परिसर में अधिवक्ताओं के चैंबर, अस्पताल, कैंटीन, वादकारियों के प्रतीक्षालय और पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई गई।
बैठक में शैलेश सिंह, अशोक सिंह दाड़ी, केशर राय, सभाजीन सिंह, राजेश श्रीवास्तव, शहनवाज खान, वकार अहमद, तनवीर अहमद, पुनीत शुक्ला, यामिनी शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने विचार रखे। बनारस बार अध्यक्ष विनोद शुक्ला और महामंत्री सुधांशु मिश्रा ने भी समर्थन जताया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में सेन्ट्रल बार अध्यक्ष प्रेम प्रकाश सिंह गौतम ने कहा कि यदि सरकार एकीकृत न्यायालय बनाना चाहती है तो विस्तार सेंट्रल जेल की भूमि पर ही होना चाहिए। इस संबंध में दोनों बार एसोसिएशन के पदाधिकारी जल्द ही उच्च न्यायालय और मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।






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