एसएसआई पब्लिक स्कूल में चार दिन तक छाया उत्साह — खिलाड़ियों ने दिखाया दम, मंच पर बिखरी प्रतिभा
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। एस.एस.आई. पब्लिक स्कूल, चौबेपुर का चार दिवसीय वार्षिक खेल महोत्सव “उमंग 3.0” गुरुवार को उत्साह, ऊर्जा और उल्लास के बीच शानदार अंदाज में संपन्न हो गया। पूरे परिसर में तालियों की गूंज, विजेताओं की मुस्कान और बच्चों के आत्मविश्वास ने समारोह को यादगार बना दिया। कार्यक्रम में समाजसेवी सिद्धार्थ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
समापन समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। विद्यालय अध्यक्ष अमित कुमार सिंह ‘सन्नी’, डायरेक्टर माधवी लता सिंह एवं सचिव अनुज कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
क्रिकेट, कबड्डी और दौड़ प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों ने पूरे जोश के साथ प्रदर्शन किया। हर मुकाबले में जीत की चाह और खेल भावना का अद्भुत संतुलन देखने को मिला।
वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छात्र-छात्राओं के नृत्य और गीतों ने माहौल को उत्सव में बदल दिया। अभिभावकों और अतिथियों ने तालियों से बच्चों का उत्साह बढ़ाया।
मुख्य अतिथि सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि खेल जीवन में अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास पैदा करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा —
“जीत-हार मायने नहीं रखती, मैदान में उतरने वाला हर खिलाड़ी विजेता होता है।”
विद्यालय के प्राचार्य आर.पी. शाही ने बताया कि प्रतियोगिताओं ने बच्चों की प्रतिभा को निखारा और उनमें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित की।
प्रतियोगिता परिणाम
100 मीटर दौड़: प्रथम — शिवम पांडे, द्वितीय — यादवेश, तृतीय — सक्षम पांडे
200 मीटर दौड़: प्रथम — सिब्बू, द्वितीय — आंचल यादव, तृतीय — मनीषा यादव
क्रिकेट: विजेता — कक्षा 6, उपविजेता — कक्षा 7
कबड्डी (बालिका वर्ग): विजेता — ब्लू हाउस, उपविजेता — येलो हाउस
सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी: अंगद यादव, प्रियांशु वर्मा, यश जायसवाल, अखिलेश यादव, निक्की चौबे, अश्विनी उपाध्याय
मुख्य अतिथि ने विजेता व उपविजेता खिलाड़ियों को मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। आयोजन को सफल बनाने में एएमडी अतुल सिंह, कोऑर्डिनेटर आदर्श तिवारी, डॉ. स्वतंत्र सिंह, रोली सिंह सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं और कर्मचारियों का विशेष योगदान रहा।
चार दिनों तक चला यह खेल उत्सव बच्चों के आत्मविश्वास, अनुशासन और प्रतिभा का उत्सव बन गया — सच में, “उमंग” अपने नाम के अनुरूप हर दिल में ऊर्जा भर गया।



