सुदामा चरित्र के मार्मिक वर्णन से नम हुईं आंखें, भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
(रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय)
चौबेपुर (वाराणसी)। क्षेत्र के गौरा रोड स्थित हनुमान मंदिर के समीप आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन बुधवार को भक्ति और भावनाओं के अद्भुत संगम के साथ हुआ। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र एवं भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कथावाचक कृष्ण शरण महाराज ने अपने प्रवचन में सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण की अटूट मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में न कोई भेदभाव होता है और न ही अहंकार। उन्होंने बताया कि सुदामा की दरिद्रता और श्रीकृष्ण के वैभव के बावजूद दोनों के बीच स्नेह, समर्पण और सम्मान का जो भाव था, वह समाज के लिए प्रेरणादायक आदर्श प्रस्तुत करता है।
जैसे ही कृष्ण-सुदामा मिलन का प्रसंग आया, पूरे पंडाल का वातावरण भावुक हो उठा और अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कथावाचक ने कहा कि भगवान अपने भक्तों के निष्कलंक प्रेम के भूखे होते हैं और सच्चे हृदय से की गई भक्ति का प्रतिफल अवश्य मिलता है।
समापन अवसर पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति के भोलानाथ उपाध्याय, प्रदीप सोनी, राजू सेठ, अजय गुप्ता ‘अकेला’, कुमुद उपाध्याय, अनिल जायसवाल, संजय बरनवाल, मनोज चौरसिया, विशाल सेठ, संजय चौरसिया, नीरज गुप्ता, विपुल उपाध्याय, मोहित चौबे, शारदा चतुर्वेदी, गुड़िया गुप्ता, सुमन सेठ, सोनी सेठ, मंजू देवी, यश चौबे, महादेव सिंह सहित अन्य लोगों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने कथावाचक कृष्ण शरण महाराज को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा भावभीनी विदाई दी। इस अवसर पर क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।





