संगठन ने दी चेतावनी—आदेश वापस न हुआ तो जून से खाद्यान्न वितरण हो सकता है प्रभावित
वाराणसी: प्रदेश में 500 से कम यूनिट वाले राशन की दुकानों को विलय अथवा समाप्त करने के शासन के हालिया आदेश ने कोटेदारों के बीच चिंता की लहर पैदा कर दी है। इस फैसले को लेकर राशन विक्रेता संगठन ने कड़ा विरोध जताया है और इसे आजीविका पर सीधा प्रहार बताया है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष गिरीश तिवारी ने कहा कि प्रदेश के कोटेदारों का लाभांश पहले से ही अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है, जिसके लिए संगठन लंबे समय से संघर्ष कर रहा है। ऐसे में यह नया आदेश उनकी समस्याओं को और बढ़ाने वाला है।
उन्होंने आशंका जताई कि इस निर्णय के लागू होने से प्रदेश में लगभग 30 हजार कोटेदारों की दुकानें प्रभावित हो सकती हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।
इस मुद्दे को लेकर वाराणसी में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन के पदाधिकारियों ने आगे की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि सरकार इस आदेश को शीघ्र वापस नहीं लेती है, तो जून माह से खाद्यान्न उठान एवं वितरण कार्य को बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है।
बैठक में प्रदेश सचिव अजय जायसवाल, जिला अध्यक्ष लक्ष्मीकांत पाण्डेय, महानगर अध्यक्ष मदन यादव, देवबलि सिंह, प्रभु नारायण पांडेय, दिलीप गिरि, संदीप मिश्रा, तहसील अध्यक्ष आराजी लाइन दिनेश गुप्ता तथा शुभम पाण्डेय सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।






