बाबा विश्वनाथ के दरबार में आध्यात्मिक आरंभ, फिर विकास परियोजनाओं की ओर बढ़े कदम; काशी ने देखा आस्था और प्रगति का अद्भुत संगम
वाराणसी। नरेंद्र मोदी के काशी दौरे का दूसरा दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और विकास के संकल्प का प्रतीक बनकर उभरा। बुधवार की सुबह प्रधानमंत्री ने काशी की पावन धरती पर अपने कार्यक्रमों की शुरुआत बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन से की, जहां श्रद्धा, परंपरा और भव्यता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से जलाभिषेक और पूजन-अर्चन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न हुए इस अनुष्ठान ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अवलोकन कर भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा के प्रति सम्मान भी व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री का पारंपरिक तरीके से त्रिशूल और डमरू भेंट कर स्वागत किया गया। यह स्वागत न केवल काशी की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक था, बल्कि आस्था और सम्मान की गूंज भी था।
सुबह बरेका गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम के बाद प्रधानमंत्री ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने काशी की जमीनी स्थिति और जनभावनाओं का जायजा लिया।
दर्शन-पूजन के पश्चात प्रधानमंत्री बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचे और वहां से गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के लिए रवाना हुए। उनका निर्धारित प्रस्थान समय सुबह 10:45 बजे रहा।
सुरक्षा के चलते उड़ानों पर असर
प्रधानमंत्री के एयरपोर्ट से प्रस्थान के दौरान सुरक्षा कारणों से उड़ान संचालन प्रभावित रहा।
मुंबई जाने वाली इंडिगो फ्लाइट विलंब से रवाना हुई
दिल्ली जाने वाली एयर इंडिया की उड़ान लगभग एक घंटे देरी से उड़ी
चेन्नई से आने वाली फ्लाइट भी निर्धारित समय से देर से पहुंची
बाबतपुर एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री के स्वागत और विदाई के लिए समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों में उत्साह और गर्व का माहौल साफ झलक रहा था।
प्रधानमंत्री का यह दौरा काशी की आध्यात्मिक पहचान और विकास की गति—दोनों को एक साथ जोड़ने वाला रहा।
एक ओर जहां बाबा विश्वनाथ के चरणों में श्रद्धा अर्पित की गई, वहीं दूसरी ओर आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में ठोस कदम भी बढ़ाए गए।
काशी ने एक बार फिर देखा—जहां आस्था है, वहीं विकास की नई राह भी है।




