राष्ट्रीय वेबिनार में साहित्य, संस्कृति और मानवता पर रवीन्द्र दा के योगदान पर हुई चर्चा
(रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय)
वाराणसी। रवीन्द्र नाथ ठाकुर केवल भारत के ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के महान कवि और विचारक थे। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, राष्ट्रवाद और मानवता को वैश्विक पहचान दिलाने का कार्य किया। यह विचार प्रोफेसर बीएन जुयाल एजुकेशनल फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए।
“विश्व मानवता और भारतीयता के सांस्कृतिक कवि : रवीन्द्र नाथ ठाकुर” विषय पर आयोजित इस वेबिनार का शुभारंभ ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. अंबिका प्रसाद गौड़ के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि रवीन्द्र नाथ ठाकुर के व्यक्तित्व और साहित्य में मानवता का भाव पूरी गहराई से समाहित था।
वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. अत्रि भारद्वाज ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि रवीन्द्र नाथ ठाकुर ने साहित्य की लगभग हर विधा में उत्कृष्ट लेखन किया और अपनी रचनाओं से भारतीय साहित्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
शांति निकेतन विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर हरिश्चंद्र मिश्र ने बताया कि “गीतांजलि” के लिए नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले रवीन्द्र नाथ ठाकुर एशिया के पहले साहित्यकार थे। उन्होंने वर्ष 1901 में शांति निकेतन की स्थापना की, जो आगे चलकर 1921 में विश्वभारती विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित हुआ।
डीएवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, देहरादून के प्रोफेसर रामविनय सिंह ने कहा कि “गीतांजलि” ईश्वर और मानवता के प्रति समर्पित अमर गीतों का अनुपम संग्रह है, जिसने विश्व साहित्य में विशेष स्थान बनाया।
हिंदी साहित्य अकादमी, देहरादून की अध्यक्ष श्रीमती मीरा नवेली ने बताया कि ब्रिटिश सरकार ने रवीन्द्र नाथ ठाकुर को “नाइट ऑफ सर” की उपाधि से सम्मानित किया था, लेकिन जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में उन्होंने यह सम्मान लौटा दिया था।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए साहित्यकार डॉ. देवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि कुछ महान विभूतियां देश और काल की सीमाओं से परे होती हैं और रवीन्द्र नाथ ठाकुर उन्हीं महान व्यक्तित्वों में से एक थे।




