पत्रकार वार्ता में डॉ. सुनील कुमार ने रखा वैकल्पिक आध्यात्मिक दृष्टिकोण, धार्मिक परंपराओं एवं गुरु-परंपरा पर भी व्यक्त किए विचार
रिपोर्ट : विवेक राय
SHREE 7NEWS, वाराणसी। मालवीय कैंसर सेंटर के समीप स्थित इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर एजुकेशन, वाराणसी में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में डॉ. सुनील कुमार ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के प्रकरण पर अपना वैकल्पिक आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस विषय को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में भी समझने की आवश्यकता है। उनके अनुसार यह “धन का नहीं, मन का फेर” है, जिसकी निष्पक्ष आध्यात्मिक समीक्षा होनी चाहिए।
पत्रकारों को संबोधित करते हुए डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के तीन प्रमुख आयाम—तन, मन और आत्मा—होते हैं। उन्होंने बताया कि तन केवल कर्म का साधन है, जबकि मन व्यक्ति के विचारों और निर्णयों का संचालन करता है। उनके अनुसार यदि मन पर पड़ने वाले संस्कार अथवा गुरु-परंपरा में विकृतियां उत्पन्न हो जाएं तो उसका प्रभाव व्यक्ति के आचरण और समाज दोनों पर पड़ सकता है।
उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि यदि किसी धार्मिक अनुष्ठान में ऐसी कर्मकांडीय परंपराओं का समावेश हो, जिन्हें वे “असुर प्रवृत्ति” से जोड़ते हैं, तो उसका प्रभाव केवल अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यापक सामाजिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी दिखाई दे सकता है। इसी आधार पर उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा से संबंधित कर्मकांडों की आध्यात्मिक समीक्षा कराए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. सुनील कुमार ने वर्तमान युग में महर्षि वेदव्यास और महर्षि मार्कण्डेय को आदर्श गुरु के रूप में स्वीकार किए जाने की बात कही। उन्होंने महाभारत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए गुरु-परंपरा की वर्तमान स्थिति पर भी अपने विचार व्यक्त किए तथा दावा किया कि आध्यात्मिक दिशा में आई विकृतियों के कारण समाज अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहा है।
उन्होंने ज्योतिषीय परंपराओं पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि कथित रूप से “असुर ग्रहों” को अधिक महत्व दिए जाने से समाज में संघर्ष, अशांति और प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होने की आशंका बढ़ती है। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं व्यापक आध्यात्मिक समीक्षा कराने तथा संबंधित धार्मिक अनुष्ठानों का नेतृत्व एवं मार्गदर्शन करने वाले पदाधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
पत्रकार वार्ता के दौरान डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने विचारों के समर्थन में “राहु के गुण” तथा “राशि और राशि स्वामी” विषयक दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं।




