स्वर्वेद महामंदिर धाम में भक्ति और आत्मबोध का अलौकिक संगम

कबीर प्राकट्य महोत्सव के प्रथम दिवस संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने दिया आत्मज्ञान, समदृष्टि और मानवता का संदेश

 

रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय 

SHREE 7NEWS, वाराणसी। स्वर्वेद महामंदिर धाम में सद्गुरु कबीर साहेब के प्राकट्य दिवस के पावन अवसर पर आयोजित द्विदिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव का प्रथम दिवस श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक चेतना के अनुपम वातावरण के बीच संपन्न हुआ। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने संत वाणी, भजन, ज्ञान-दीक्षा और सेवा कार्यों के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के करकमलों द्वारा ‘अ’ अंकित श्वेत ध्वज के ध्वजारोहण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण छा गया और श्रद्धालुओं ने संत कबीर की शिक्षाओं को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

 

अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब की वाणी केवल शब्द नहीं, बल्कि आत्मा का दिव्य प्रकाश है। श्रद्धा और विश्वास के साथ उसका अनुसरण करने वाला साधक अपने भीतर के अज्ञान, अहंकार और मोह का अंधकार दूर कर आत्मबोध की ओर अग्रसर होता है।

 

उन्होंने कहा कि कबीर साहेब ने जीवनभर अनुभव-आधारित सत्य का संदेश दिया। केवल ग्रंथों का अध्ययन पर्याप्त नहीं है, बल्कि मनुष्य को अपने अंतर्मन में उतरकर आत्मस्वरूप का साक्षात्कार करना चाहिए। यही सच्ची भक्ति और आध्यात्मिक जीवन का मूल आधार है।

 

संत प्रवर ने कबीर साहेब के प्रसिद्ध दोहे—

 

“कबीरा खड़ा बाजार में, लिए लुगाठी हाथ।

जो घर फूँके आपना, चले हमारे साथ॥”

 

का आध्यात्मिक अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि यहाँ ‘घर’ का अर्थ बाहरी भवन नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर बसे अहंकार, अज्ञान और आसक्ति से है। जो साधक इन बंधनों का त्याग कर देता है, वही आत्मिक उन्नति के पथ पर आगे बढ़ता है।

 

उन्होंने कबीर साहेब के दूसरे प्रसिद्ध दोहे—

 

“कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर।

ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर॥”

 

का उल्लेख करते हुए कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा से जुड़ जाता है, उसके मन में न किसी के प्रति द्वेष रहता है और न ही पक्षपात। समभाव, करुणा और विश्वबंधुत्व ही संत कबीर की शिक्षा का वास्तविक सार है।

 

महोत्सव के अंतर्गत दोपहर में ब्रह्मविद्या विहंगम योग की क्रियात्मक ज्ञान-दीक्षा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में जिज्ञासुओं ने दीक्षा ग्रहण कर आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत की। वहीं, प्रसिद्ध भजन गायकों द्वारा प्रस्तुत कबीर भजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

 

कार्यक्रम के दौरान विशाल निःशुल्क भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। साथ ही आयुर्वेदाचार्यों एवं चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सा परामर्श एवं औषधि वितरण की व्यवस्था भी की गई, जिसका बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ उठाया।

 

पूरे दिन स्वर्वेद महामंदिर धाम में सेवा, साधना, अनुशासन और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा। कबीर प्राकट्य महोत्सव का प्रथम दिवस इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि जहाँ श्रद्धा होती है, वहीं संत वाणी आत्मा का दीपक बनकर मानव जीवन को सत्य, शांति और आत्मबोध के प्रकाश से आलोकित करती है।

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