आंदोलनकारियों ने पूछा—अधिकार और समान अवसर की मांग पर राजनीतिक दल खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहे?
रिपोर्ट: अभिषेक उपाध्याय
जौनपुर। यूजीसी के मुद्दे को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रमुख राजनीतिक दलों की कथित चुप्पी अब चर्चा का विषय बनती जा रही है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह मामला किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि पात्रता के आधार पर सभी वर्गों को समान अवसर और आरक्षण उपलब्ध कराने की मांग से जुड़ा हुआ है।
आंदोलनकारियों के अनुसार, अब तक भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से इस मुद्दे पर खुलकर समर्थन या स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में उन नेताओं की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, जिन्हें विभिन्न वर्गों के लोग चुनाव के दौरान अपना प्रतिनिधि और हितैषी मानकर समर्थन देते हैं।
लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान राजनीतिक दल विभिन्न वर्गों के मतदाताओं के बीच पहुंचकर उनके हितों और अधिकारों की बात करते हैं। लेकिन जब किसी वर्ग या समूह से जुड़ा मुद्दा आंदोलन का रूप लेता है, तो राजनीतिक दलों और नेताओं की सक्रियता अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है।
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि मांग संविधान और निर्धारित नियमों के दायरे में पात्र लोगों को अधिकार एवं अवसर सुनिश्चित करने से संबंधित है, तो राजनीतिक दलों को इस विषय पर अपनी स्पष्ट राय सार्वजनिक करनी चाहिए। उनका सवाल है कि ऐसे मुद्दे पर नेताओं की ओर से खुलकर पक्ष रखने से परहेज क्यों किया जा रहा है?
फिलहाल यूजीसी के मुद्दे को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच राजनीतिक दलों की चुप्पी को लेकर बहस तेज है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कोई प्रमुख राजनीतिक दल इस मुद्दे पर खुलकर अपना पक्ष रखता है या फिर राजनीतिक दलों की चुप्पी आगे भी कायम रहती है।




