कालीमठ में श्रृंगार महोत्सव की पहली निशा, भजनों-वाद्यों से गूंजा दरबार
वाराणसी। लक्सा स्थित प्राचीन कालीमठ में चल रहे 16 दिवसीय अनुष्ठान मेले के समापन पर सोमवार को तीन दिवसीय भव्य श्रृंगार संगीत महोत्सव का शुभारंभ हुआ। प्रथम निशा में मां काली का पंचामृत स्नान कर नए वस्त्र और आभूषणों से श्रृंगार किया गया। फूलों से सजे दरबार में महंत पं. ठाकुर प्रसाद दुबे ने विधिविधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर 11 वैदिक ब्राह्मणों ने मंगलाचरण का पाठ किया और मुख्य पुजारी पं. विकास दुबे ‘काका गुरु’ ने आरती उतारी।
सायंकाल महोत्सव का शुभारंभ भाजपा संस्कृति प्रकोष्ठ के संयोजक गीतकार कन्हैया दुबे ‘केडी’ के संयोजन में हुआ। पूर्वांचल के कलाकारों ने वादन, गायन और नृत्य प्रस्तुत कर वातावरण को भक्ति भाव से सराबोर कर दिया। पं. जवाहरलाल और उनके साथियों ने शहनाई की मंगल ध्वनि के साथ देवी गीतों की प्रस्तुति दी। पं. सुखदेव मिश्र (वायलिन), डॉ. सत्यवर प्रसाद (मृदंग), अमरेंद्र मिश्र (सितार) और श्रीकांत मिश्र (तबला) ने वाद्य यंत्रों की जुगलबंदी से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पं. माता प्रसाद मिश्र और पं. रुद्रशंकर मिश्र ने या देवी सर्वभूतेषु पर कथक नृत्य प्रस्तुत कर मां काली के दरबार में हाजिरी लगाई। वहीं, लोकगायिका ज्योति माही ने है काली मां तुम न सुनोगे तो कौन सुनेगा गीत से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। भोजपुरी गायक भरत शर्मा व्यास ने पचरा और अन्य देवी गीत गाकर वातावरण को भक्ति रस में रंग दिया। उनके गीतों पर श्रद्धालु झूम उठे।
गीतांजलि मौर्य, राजेश तिवारी ‘रतन’, विश्वकर्मा, अदिति शर्मा, कुमार विनीत, पारुल नंदा और सृष्टि शर्मा सहित अनेक कलाकारों ने भजन और नृत्य प्रस्तुत कर देर रात तक श्रद्धालुओं को बांधे रखा। संगत में सुधांशु राजपूत (तबला), मोती शर्मा व विशाल शर्मा (ढोलक), जियाराम (बैंजो), शेखर विवेक (पैड) और नीरज पांडे (कीबोर्ड) शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान कलाकारों का स्वागत स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्रम और प्रसाद देकर किया गया। स्वागत करने वालों में महेश पांडेय, रवि पांडेय, गुड्डू विनोद कुमार, उन्नी, जितेंद्र प्रजापति और पारस यादव शामिल रहे।




