मड़ियाहूं–बरसठी में अलाव नहीं, पेड़ों की कटाई पर भी सवाल
रिपोर्ट अभिषेक उपाध्याय
जौनपुर। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बीच मड़ियाहूं–बरसठी क्षेत्र में प्रशासनिक तैयारियां धरातल पर नदारद दिख रही हैं। प्रमुख चौराहों पर अलाव की व्यवस्था न होने से राहगीरों, मजदूरों, बुजुर्गों और गरीब तबके के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निगोह, मियाचक, कटवार और रसूलहा जैसे व्यस्त तिराहों पर अब तक अलाव नहीं जलाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठंड बढ़ने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे आमजन ठिठुरने को मजबूर है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार इस संबंध में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को शिकायत भी दी गई, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। प्रशासन की उदासीनता से क्षेत्र में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
इधर, वनविभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में हरे और सूखे पेड़ों की अवैध कटाई धड़ल्ले से जारी है, जबकि इसे रोकने के लिए कोई सख्ती नहीं दिखाई जा रही। आश्चर्य की बात यह है कि अलाव के लिए लकड़ी उपलब्ध कराने के नाम पर विभाग असमर्थता जता रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष ठंड के मौसम में अलाव की व्यवस्था केवल कागजों में दिखाई जाती है। जमीनी स्तर पर न तो अलाव जलते हैं और न ही ठंड से राहत के कोई ठोस इंतजाम नजर आते हैं।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी प्रमुख तिराहों और सार्वजनिक स्थलों पर तत्काल अलाव की व्यवस्था कराई जाए। साथ ही वनविभाग द्वारा अवैध पेड़ कटान पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को ठंड से राहत मिले और पर्यावरण की रक्षा हो सके।







