माँ गंगा सेवा समिति प्रयागराज के शिविर में नित्य पूजन, भजन-कीर्तन व प्रसाद वितरण
प्रयागराज। जहाँ निरंतर सुरसुरी गंगा प्रवाहित होती हैं, वहीं अभयंकर शिव का वास माना जाता है। शिव-प्रिया गंगा और गंगाधर शिव की इस पावन भूमि पर माघ मास के दौरान आध्यात्मिक वातावरण अपने चरम पर है। माँ गंगा सेवा समिति, प्रयागराज द्वारा विद्वान तीर्थ पुरोहितों के सान्निध्य में समस्त धार्मिक अनुष्ठान एवं कर्मकांड विधिपूर्वक संपन्न कराए जा रहे हैं।
स्वर्गीय तपस्वी महाराज के आशीर्वाद से शिविर का आयोजन
स्वर्गीय तपस्वी महाराज श्री श्री 1008 विश्वनाथ दास जी के आशीर्वाद से आयोजित इस शिविर में संयोजक आशीष शुक्ला ‘दीपू भइया’ द्वारा शिवलिंग की स्थापना की गई है। शिविर में प्रतिदिन नित्य पूजन, शिव अमृतवाणी (ॐ नमः शिवाय), सीताराम का जाप, भजन-कीर्तन एवं आरती के उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जा रहा है।
जहाँ शिव, वहाँ शक्ति—अस्थायी शिवलिंग की स्थापना
नमामि गंगे अभियान के संयोजक राजेश शर्मा ने बताया कि “जहाँ शिव होते हैं, वहाँ शक्ति का वास स्वतः होता है।” इसी श्रद्धा भाव से गंगा क्षेत्र में अस्थायी शिवलिंग की स्थापना की गई है, ताकि आमजन गंगा तट पर शिवलिंग के दर्शन-पूजन कर पुण्य के सहभागी बन सकें।
प्रयागराज: मोक्ष द्वार और भारतीय संस्कृति का संगम
प्रयाग की धरती को ऋषि-मुनियों की तपोभूमि माना जाता है, जिन्होंने तपस्या कर इसे मोक्ष का द्वार बनाया। प्रयागराज केवल पवित्र नदियों का संगम स्थल ही नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आस्था के विविध रंगों का संगम है। देश के कोने-कोने से ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के श्रद्धालु, किसान, वनवासी और सनातनी भक्त संगम में स्नान कर आत्मा और मन की शुद्धि का प्रयास करते हैं।
आस्था के बल पर उमड़ता जनसैलाब
विशेष तिथियों पर सनातन धर्मावलंबी गंगा स्नान को महापुण्य मानते हैं। बिना किसी निमंत्रण, सूचना या भौतिक लोभ-लालच के लाखों श्रद्धालु कष्ट सहकर प्रयागराज पहुंचते हैं और संगम में अमृत स्नान कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते हैं।
भक्तों और पदाधिकारियों की रही सहभागिता
इस अवसर पर नमामि गंगे, गंगा विचार मंच और माँ गंगा सेवा समिति के पदाधिकारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तजन उपस्थित रहे। पूरे क्षेत्र में हर-हर महादेव और गंगा मैया की जयकारों से आध्यात्मिक वातावरण गुंजायमान रहा।







