सामुदायिक शिक्षा के तहत नन्हे विद्यार्थियों ने जाना पुलिस सेवा का वास्तविक अर्थ
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी) गुरुवार की सुबह एचजी स्कूल डुबकियां के कक्षा एक के 45 नन्हे विद्यार्थी अपने शिक्षकों के साथ चौबेपुर थाना पहुंचे तो उनके मन में जिज्ञासा के साथ हल्की झिझक भी थी। थाने का नाम सुनते ही जो स्थान अक्सर डर का प्रतीक लगता है, वही स्थान आज उनके लिए सीखने की पाठशाला बनने वाला था।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अंबिका प्रसाद गौड़ ने बच्चों को समझाया कि पुलिस का कोई निश्चित कार्यसमय नहीं होता, वह दिन-रात समाज की सेवा और सुरक्षा के लिए तत्पर रहती है। उनके सहज शब्दों ने बच्चों के मन से पहला डर दूर कर दिया।
इसके बाद उप निरीक्षक चंद्र मोहन यादव ने बच्चों का आत्मीय स्वागत करते हुए पूरे थाना परिसर का भ्रमण कराया। उन्होंने सरल भाषा में बताया कि पुलिस से डरना नहीं चाहिए, पुलिस जनता की मदद के लिए होती है और केवल गलत काम करने वाला ही पुलिस से डरता है। उन्होंने बच्चों को मोबाइल के सीमित उपयोग, अनजान कॉल से सावधान रहने और साइबर फ्रॉड से बचने के आसान उपाय भी बताए।
कांस्टेबल मेहताब आलम, दीवानजी, शैलेश कुमार यादव, हेड कांस्टेबल योगेंद्र प्रसाद और प्रदीप दुबे ने बच्चों को थाने की विभिन्न व्यवस्थाएं दिखाईं और उनके सवालों का प्यार से जवाब दिया। इस दौरान मुख्य अध्यापिका सुचिता तिवारी, गरिमा राज पांडेय, राहुल तिवारी, गुलाम मुस्तफा और शशिबाला श्रीवास्तव लगातार बच्चों का मार्गदर्शन करती रहीं।

भ्रमण समाप्त होने तक बच्चों की आंखों में चमक और चेहरे पर आत्मविश्वास था।
जो जगह पहले डर का नाम लगती थी, अब सुरक्षा और भरोसे का प्रतीक बन चुकी थी।
उस दिन बच्चों ने किताबों से नहीं, अनुभव से सीखा — पुलिस वर्दी नहीं, विश्वास की पहचान है।



