गौ- ब्राह्मण संरक्षण और निर्बल सनातनियों की सहायता के लिए समर्पित होगी नई पहल
वाराणसी: वर्तमान समय में बढ़ती चुनौतियों के बीच सनातन धर्म के प्रतीकों की सुरक्षा और समाज के कमजोर वर्गों के संरक्षण को लेकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘चतुरंगिणी’ के गठन की प्रक्रिया प्रारम्भ करने की घोषणा की है। यह पहल गौ-माता, विद्वान ब्राह्मणों तथा निर्बल सनातनियों की रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है।
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि केवल शास्त्र-चर्चा से अब कार्य नहीं चलेगा, बल्कि समाज की सुरक्षा के लिए संगठित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने भगवान परशुराम के संकल्प का स्मरण करते हुए इस चतुरंगिणी को धर्म और समाज रक्षा का सशक्त माध्यम बताया।
उन्होंने कहा कि यह संगठन समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की सहायता करेगा और उन्हें सुरक्षा का भरोसा देगा। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त भय को समाप्त कर प्रत्येक सनातनी को निर्भय बनाना है, ताकि वह अन्याय के खिलाफ खुलकर आवाज उठा सके और सत्य के मार्ग पर अडिग रह सके।
शंकराचार्य ने विश्वास जताया कि जब समाज को यह अनुभूति होगी कि उसके पीछे एक संगठित एवं सक्षम शक्ति खड़ी है, तब वह अधिक आत्मविश्वास के साथ धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर अग्रसर होगा।




