चोलापुर शहीद स्मारक की अनदेखी पर आक्रोश—1942 के वीरों को अब तक नहीं मिला उचित सम्मान
वाराणसी। जनपद के चोलापुर स्थित शहीद स्मारक पर राष्ट्रीय ध्वज न लगाए जाने को लेकर अब मामला उच्च स्तर तक पहुंच गया है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एवं किसान नेता अजीत सिंह डोभी ने महामहिम राष्ट्रपति को पत्र भेजकर वाराणसी के सांसदों, विधायकों और उच्च अधिकारियों की सैलरी व भत्ते रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक शहीदों के सम्मान में 101 फीट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज नहीं लगाया जाता, तब तक यह कदम उठाया जाना चाहिए।
पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान चोलापुर थाने में ऐतिहासिक घटना घटी थी, जब देशभक्तों ने ब्रिटिश झंडे को उतारकर भारतीय ध्वज फहराने का प्रयास किया। इस दौरान अंग्रेजी हुकूमत ने पांच वीर सपूतों—राम नरेश उपाध्याय, पंचम राम, श्रीराम उर्फ बच्चू पटेल, चौथी राजभर और निरहू पटेल—को गोली मार दी थी।
आरोप है कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी इन शहीदों के सम्मान में जिले के एकमात्र शहीद स्मारक पर राष्ट्रीय ध्वज तक नहीं लगाया गया। जबकि यहां कई बड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों का आगमन हो चुका है और समय-समय पर आश्वासन भी दिए गए, लेकिन धरातल पर कोई ठोस पहल नहीं हुई।
पत्र में यह भी कहा गया है कि हर वर्ष 17 अगस्त को शहीद दिवस के अवसर पर भी प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक कार्यक्रम या श्रद्धांजलि समारोह आयोजित नहीं किया जाता, जिससे क्षेत्रवासियों में गहरा आक्रोश है।
अजीत सिंह डोभी ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री, सांसद, जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर को भी ज्ञापन सौंपा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि इस गंभीर विषय पर उदासीन बने हुए हैं।
उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की है कि शहीदों के बलिदान को ध्यान में रखते हुए संबंधित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सैलरी व मानदेय तब तक रोकी जाए, जब तक चोलापुर शहीद स्मारक पर 101 फीट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज स्थापित नहीं कर दिया जाता।
इस मांग को लेकर क्षेत्र के किसानों और युवाओं में भी रोष व्याप्त है और वे इसे देश के वीर शहीदों के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मान रहे हैं।





