छात्रसंघ अध्यक्ष से ब्लॉक प्रमुख और विधायक तक पहुंचे, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में रहे सक्रिय
रिपोर्ट अभिषेक उपाध्याय
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की राजनीति में पंडित शचीन्द्रनाथ त्रिपाठी का नाम प्रमुख नेताओं में लिया जाता है। क्षेत्र में ‘गुरुजी’ के नाम से लोकप्रिय शचीन्द्रनाथ त्रिपाठी ने छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और आगे चलकर ब्लॉक प्रमुख तथा विधायक के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनका राजनीतिक सफर संघर्ष, संगठनात्मक सक्रियता और क्षेत्रीय राजनीति में लंबे समय तक बनी उनकी उपस्थिति का परिचायक रहा।
उनका पैतृक गांव हरद्वारी जौनपुर जिले के बरसठी क्षेत्र में स्थित है। वह एक राजनीतिक परिवार से संबंध रखते थे। उनके पिता पंडित रमेश चंद्र शर्मा भी बरसठी विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक निर्वाचित हुए थे। पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच शचीन्द्रनाथ त्रिपाठी ने विज्ञान विषय में स्नातक स्तर तक शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 1966-67 में वह जौनपुर के तिलकधारी महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए।
छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में मिली पहचान ने उनके राजनीतिक जीवन की नींव मजबूत की और इसके बाद उन्होंने स्थानीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। ब्लॉक प्रमुख के रूप में लंबा कार्यकाल: वर्ष 1984 में शचीन्द्रनाथ त्रिपाठी बरसठी के ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए। स्थानीय समाचार रिपोर्टों के अनुसार, वह लगभग दो दशकों तक इस पद पर बने रहे।
इस दौरान उन्होंने ग्रामीण राजनीति में अपनी सक्रियता बनाए रखी और क्षेत्रीय स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विधानसभा चुनावों में उतार-चढ़ाव: शचीन्द्रनाथ त्रिपाठी ने वर्ष 1985 में कांग्रेस के टिकट पर मड़ियाहूं विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली।
इसके बाद वर्ष 1993 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में बरसठी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे, जहां उन्हें फिर हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2002 में उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा और बरसठी विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने।
वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। हालांकि, उन्होंने राजनीतिक सक्रियता जारी रखी और वर्ष 2012 में जौनपुर जिले की जफराबाद विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज कर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें जफराबाद सीट से हार का सामना करना पड़ा। पारिवारिक जीवन: शचीन्द्रनाथ त्रिपाठी के पिता पंडित रमेश चंद्र शर्मा भी क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे। उनके पुत्र आलोक त्रिपाठी, जिन्हें ‘लकी’ के नाम से जाना जाता है, और पुत्री संध्या हैं। उनका परिवार भी विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रहा है।
निधन से राजनीतिक जगत में शोक: फरवरी 2018 में लखनऊ स्थित अपने आवास पर गिरने के कारण शचीन्द्रनाथ त्रिपाठी के सिर में गंभीर चोट लग गई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह लंबे समय तक कोमा में रहे। 25 जून 2018 की रात लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उनका निधन हो गया।
उनके निधन की खबर से जौनपुर के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बाद में वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। राजनीतिक विरासत: पंडित शचीन्द्रनाथ त्रिपाठी का जीवन छात्रसंघ अध्यक्ष से लेकर ब्लॉक प्रमुख और विधायक बनने तक की राजनीतिक यात्रा का उदाहरण रहा।
बरसठी और जफराबाद क्षेत्रों में उनकी सक्रियता तथा ‘गुरुजी’ के नाम से बनी पहचान उनके सार्वजनिक जीवन के प्रमुख पहलू रहे। कांग्रेस से राजनीतिक शुरुआत करने के बाद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में उन्होंने जौनपुर की राजनीति में अपनी अलग पहचान स्थापित की






