गंगा अब आस्था ही नहीं, नए जीवन और उम्मीद की धारा भी : संदीप बेहेरा
प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज में गंगा का बदलता स्वरूप अब लोगों को नई आशा और सुकून देने लगा है। जल शक्ति मंत्रालय के सलाहकार संदीप बेहेरा ने अपने पिता के अंतिम संस्कार के दौरान इसे बेहद करीब से महसूस किया। उन्होंने कहा कि गंगा अब केवल आस्था और अनुष्ठान की नदी नहीं रही, बल्कि यह एक बार फिर जीवन, गरिमा और समृद्धि की धारा बन चुकी है।
संदीप बेहेरा 19-20 अगस्त को अपने पिता का अंतिम संस्कार करने संगम पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि घाटों की स्वच्छता, गंगा का साफ जल और सुव्यवस्थित माहौल ने शोक की घड़ी में भी उन्हें शांति और आत्मबल दिया।
“ऐसा लगा मानो गंगा स्वयं मेरे पिता की अंतिम यात्रा को अपनी गोद में समेट रही हों,” उन्होंने भावुक स्वर में कहा।
गंगा के बदलते स्वरूप पर उन्होंने कहा कि नमामि गंगे मिशन ने प्रयागराज की तस्वीर बदल दी है।
नालों का पानी रोकने के लिए नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं।
पानी की गुणवत्ता सुधरी है और जलीय जीवन लौट रहा है।
स्थानीय समुदाय, विद्यार्थी और संत–महात्मा इस अभियान से जुड़कर गंगा की सेवा में लगे हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि कुंभ 2019 के दौरान भी दुनिया ने गंगा की इस नई छवि को देखा था, जब लाखों श्रद्धालुओं ने बिना प्रदूषण की चिंता के स्नान किया।
बेहेरा ने कहा कि गंगा अब सिर्फ पूजा-पाठ की धारा नहीं रही, बल्कि आजीविका और सांस्कृतिक गतिविधियों की भी धारा बन गई है। पर्यटन, खेती और स्थानीय रोजगार को गंगा ने फिर से सहारा देना शुरू किया है।
संगम में उन्होंने अपने पिता की अस्थियां विधि-विधान से विसर्जित कीं और पुरखों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान गंगा टास्क फोर्स, वन विभाग के रेंजर, नमामि गंगे के संयोजक राजेश शर्मा, पुश्तैनी पंडा शिव कुमार शर्मा (गंगाराम) सहित आदित्य कुमार, गोविंदा, बृजेश और मयंक अरोड़ा मौजूद रहे।
बेहेरा ने कहा—“प्रयागराज ने मुझे पिता की यादों के साथ-साथ गंगा के नए जीवन का दृश्य भी दिया है। यह मेरे लिए हमेशा अविस्मरणीय रहेगा।”



