शिक्षक, शिक्षामित्र, रसोइया व शिक्षिकाओं को मिलेगा आईपीडी कैशलेस इलाज, मुख्यमंत्री की घोषणा पर लगी मुहर
रिपोर्ट अभिषेक उपाध्याय
जौनपुर। बृहस्पतिवार को हुई कैबिनेट बैठक में बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए कैशलेस चिकित्सा सुविधा के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस निर्णय के तहत बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों एवं परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त अनुदानित व स्ववित्तपोषित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक, अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की वार्डेन, पूर्णकालिक व अंशकालिक शिक्षिकाएं तथा प्रधानमंत्री पोषण योजना की रसोइयां अब सरकारी और सूचीबद्ध निजी चिकित्सालयों में आईपीडी (अंतर्रोगी) उपचार की सुविधा प्राप्त कर सकेंगी।
इस फैसले से न केवल संबंधित कर्मियों बल्कि उनके आश्रित परिवारजनों के इलाज का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद शिक्षकों और कर्मचारियों के परिवारों में खुशी का माहौल है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस योजना की घोषणा की थी, जिसे अब अमलीजामा पहनाया गया है।
सुजानगंज में कार्यरत शिक्षक रवि प्रकाश तिवारी और नागेन्द्र सिंह ने इसे शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग बताते हुए मुख्यमंत्री के इस निर्णय को सराहनीय बताया। वहीं विकास खंड मुंगराबादशाहपुर में कार्यरत शिक्षक सुनील कुमार मणि त्रिपाठी ने कहा कि अब शिक्षकों और शिक्षामित्रों का इलाज धनाभाव के कारण बाधित नहीं होगा।
विकास खंड मछलीशहर की शिक्षिका प्रेमलता सिंह तथा मड़ियाहूं की शिक्षिका नीतू सिंह का कहना है कि यह सुविधा शिक्षकों की सेवा शर्तों को और अधिक आकर्षक बनाएगी। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में पूर्णकालिक शिक्षिका के पद पर कार्यरत लेखा सिंह ने बताया कि अब उनका पूरा परिवार कैशलेस चिकित्सा के दायरे में आ गया है।
वहीं मुंगराबादशाहपुर में कार्यरत शिक्षामित्र शेर बहादुर ने कहा कि सीमित मानदेय में इलाज का खर्च उठाना मुश्किल था, लेकिन इस सुविधा से उन्हें बड़ी राहत मिली है। मछलीशहर विकास खंड के कम्पोजिट विद्यालय बामी में कार्यरत रसोइयां सुनीता, लालती और मीना ने कहा कि कम मानदेय में महंगा इलाज संभव नहीं था, अब उनके परिवार भी बिना आर्थिक चिंता के उपचार करा सकेंगे।







