दोस्तों के बीच विवाद बना जानलेवा, विशेषज्ञों ने बताया नशा-सोशल मीडिया व संवादहीनता बड़ी वजह
रिपोर्ट अभिषेक उपाध्याय
बरसठी (जौनपुर)। बरसठी थाना क्षेत्र के जमुनीपुर गांव में शुभम शुक्ला की दिनदहाड़े हत्या की घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह सामने आया कि वारदात में शामिल सभी आरोपी नवयुवक बताए जा रहे हैं और मृतक के करीबी दोस्त थे। घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि युवाओं की मानसिकता और सामाजिक परिवेश पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छोटी बातों पर बढ़ रहा टकराव
स्थानीय लोगों का कहना है कि युवाओं में सहनशीलता कम होती जा रही है और मामूली विवाद भी हिंसक रूप ले लेता है। आक्रोश और जल्दबाजी की प्रवृत्ति के कारण रिश्तों में भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
कई सामाजिक कारण आए सामने
समाजशास्त्रियों और स्थानीय प्रबुद्धजनों के अनुसार युवाओं में बढ़ती आक्रामकता के पीछे प्रमुख कारण निम्न माने जा रहे हैं—
नशे की बढ़ती प्रवृत्ति से निर्णय क्षमता कमजोर होना
सोशल मीडिया पर दिखावे और तुलना से मानसिक दबाव
परिवारों में संवाद की कमी
शिक्षा में नैतिक मूल्यों की घटती भूमिका
दोस्ती का रिश्ता भी सवालों के घेरे में
जमुनीपुर की घटना ने यह चिंता बढ़ा दी है कि जब करीबी दोस्त ही एक-दूसरे के दुश्मन बन जाएं तो सामाजिक भरोसा किस पर टिका रहेगा। पहले जहां दोस्ती को सबसे मजबूत संबंध माना जाता था, वहीं अब तात्कालिक गुस्सा रिश्तों को खत्म कर रहा है।
समाज के लिए चेतावनी
दिनदहाड़े हुई हत्या ने यह भी संकेत दिया कि अपराधियों में कानून का भय कम होता जा रहा है। यदि समय रहते परिवार, समाज और प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
सुझाए गए समाधान
विशेषज्ञों ने युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए कुछ उपाय सुझाए हैं—
खेल, रोजगार व रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा
स्कूल-कॉलेजों में काउंसलिंग व नैतिक शिक्षा मजबूत करना
नशे के खिलाफ प्रभावी अभियान
परिवारों में संवाद और संस्कारों पर जोर
जमुनीपुर की घटना को लोग केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि समाज के लिए गंभीर चेतावनी मान रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि आने वाली पीढ़ी को सही दिशा देने के लिए सामूहिक प्रयास अब समय की जरूरत बन चुके




