मृदा परीक्षण प्रशिक्षण में किसानों को दी संतुलित खेती व जैविक उपायों की सीख
वाराणसी। चांदपुर स्थित क्षेत्रीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला परिसर में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शनिवार को कृषि सखियों, किसानों एवं कृषि प्रसार कर्मियों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और संतुलित खेती अपनाने के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर खेती की नवीन तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कृषि अधिकारी संगम सिंह ने कहा कि मिट्टी का जीवांश कार्बन उसके लिए खून के समान है। जिस प्रकार मनुष्य खून के बिना जीवित नहीं रह सकता, उसी प्रकार यदि मिट्टी का जीवांश समाप्त हो गया तो मिट्टी भी मृतप्राय हो जाएगी और मानव अस्तित्व पर संकट आ सकता है। उन्होंने कहा कि धरती मां की सेहत की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है और हमें एक जिम्मेदार पुत्र की तरह उसकी देखभाल करनी चाहिए।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे मृदा परीक्षण कराकर ही उर्वरकों का प्रयोग करें तथा जैविक और प्राकृतिक खेती के उपायों को अपनाएं, ताकि भूमि की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहे और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।
सहायक निदेशक मृदा राजेश कुमार राय ने कहा कि अधिक उत्पादन की चाह में रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग मिट्टी की संरचना को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, हरी खाद, गोबर खाद और जैविक तत्वों के प्रयोग पर बल दिया तथा किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों को मृदा नमूना लेने की विधि, पोषक तत्वों की पहचान और फसल के अनुसार उर्वरक प्रबंधन की तकनीकें भी समझाई गईं। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और कृषि विशेषज्ञों से प्रश्न पूछकर समस्याओं का समाधान प्राप्त किया।




