कुंती व भीष्म स्तुति ने श्रद्धालुओं को किया भावुक, बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
(रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय)
चौबेपुर (वाराणसी)। गौरा रोड स्थित हनुमान जी मंदिर के पास आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बाल व्यास श्री कृष्णा जी महाराज ने भगवान नारायण, नर-नारायण ऋषि, माता सरस्वती और महर्षि वेदव्यास का स्मरण कर कथा का प्रारंभ किया।
उन्होंने कहा कि जीवन में किसी भी कार्य की सफलता के लिए भगवान की कृपा आवश्यक होती है। कथा में राजा परीक्षित के जन्म का प्रसंग सुनाया गया। बताया गया कि महाभारत युद्ध के बाद अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र चलाकर उत्तरा के गर्भ को नष्ट करना चाहा, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने गर्भ में प्रवेश कर शिशु की रक्षा की। वही बालक आगे चलकर राजा परीक्षित के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

इसके बाद पांडवों के स्वर्गारोहण का वर्णन किया गया। श्रीकृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान के बाद पांडवों ने राजपाट त्याग दिया और हिमालय की ओर चले गए। रास्ते में एक-एक कर सभी गिरते गए और अंत में केवल युधिष्ठिर ही स्वर्ग पहुंचे।

माता कुंती की स्तुति का उल्लेख करते हुए बताया गया कि उन्होंने भगवान से जीवन में संकट बनाए रखने की प्रार्थना की, ताकि उनका स्मरण बना रहे। साथ ही भीष्म पितामह द्वारा शर-शैया पर भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए देह त्याग करने का प्रसंग भी सुनाया गया।

कथा के दौरान भजन-कीर्तन और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय रहा। इस अवसर पर भोला नाथ उपाध्याय, प्रदीप सोनी, अजय गुप्ता ‘अकेला’, शरद उपाध्याय, मुक्ति मौर्या, देवमणि त्रिपाठी, अजय बरनवाल, राहुल सेठ, महेन्द्र जायसवाल, सिद्धार्थ मौर्या, विनोद शास्त्री महाराज, अभय चौबे, अतुल चतुर्वेदी, हवलदार सिंह, अमित सेठ, दीपू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।




