राष्ट्रीय वेबिनार में शक्ति उपासना और महिलाओं की भूमिका पर हुई गहन चर्चा
(रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय)
वाराणसी। नवरात्रि पर्व को केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं, बल्कि नारी सशक्तिकरण के व्यापक संदर्भ में देखने की आवश्यकता है। भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूप मानते हुए उसे ‘सबला’ के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। इसी दृष्टिकोण को केंद्र में रखते हुए प्रोफेसर बीएन जुयाल एजुकेशनल फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा ‘शक्ति उपासना और नारी सशक्तिकरण’ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं शिक्षाविद् डॉ. अंबिका प्रसाद गौड़ के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार डॉ. अत्रि भारद्वाज ने अपने उद्बोधन में नारी सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए राजा राममोहन राय और ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसे समाज सुधारकों के योगदान का उल्लेख किया।
असम की शिक्षाविद् जोनाली बरुआ ने कहा कि नवरात्रि में होने वाला कन्या पूजन स्त्री शक्ति के सम्मान और उसकी महत्ता का प्रतीक है। वहीं कानपुर की प्रोफेसर गीता अस्थाना ने ‘मिशन शक्ति’ जैसी सरकारी पहलों के माध्यम से महिलाओं में जागरूकता लाने के प्रयासों को सराहा।
दरभंगा की डॉ. विदुषी आमेटा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि नारी सशक्तिकरण ही समाज की वास्तविक मजबूती का आधार है। वाराणसी की शिक्षिका ऋचा मिश्र ने स्पष्ट किया कि जब तक समाज में महिलाओं को सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक शक्ति उपासना अधूरी ही रहेगी।
योग गुरु आनंद प्रेमी ने महिला सशक्तिकरण की अग्रदूत और प्रथम शिक्षिका सावित्री बाई फुले के योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में डॉ. देवेन्द्र कुमार सिंह ने सभी वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।




