संविदाकर्मियों की छंटनी, पुराने ट्रांसफार्मरों का ठीकरा इंजीनियरों पर फोड़ने का आरोप; संघर्ष समिति ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
वाराणसी। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर गुरुवार को पूरे प्रदेश के साथ बनारस में भी बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों, अभियंताओं और संविदा कर्मियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर मनमानी करने, संविदाकर्मियों की छंटनी करने और पुराने ट्रांसफार्मरों के जलने का दोष कर्मचारियों पर मढ़ने का आरोप लगाया।
कर्मचारियों ने कहा कि 20 से 40 बार रिपेयर किए जा चुके पुराने ट्रांसफार्मर ही बार-बार क्षतिग्रस्त हो रहे हैं, जबकि नए ट्रांसफार्मर सुरक्षित हैं। इसके बावजूद अवर अभियंताओं और अन्य अधिकारियों पर मनमाने ढंग से प्रकरण डालना तानाशाही रवैये का प्रतीक है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि प्रबंधन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए कर्मचारियों को बलि का बकरा बना रहा है, जबकि वास्तविक समस्या गलत नीतियों और संसाधनों की कमी है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में करीब 2 हजार और केवल बनारस में 400 से अधिक संविदाकर्मियों की छंटनी की जा चुकी है, जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि गर्मी के मौसम से पहले संविदाकर्मियों की वापसी नहीं हुई, तो विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि लखनऊ, अयोध्या, मेरठ सहित अन्य शहरों में लागू वर्टिकल व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
संघर्ष समिति ने बताया कि अयोध्या में एक आदेश के तहत 52 अल्प वेतनभोगी संविदाकर्मियों को एक साथ हटाया गया, जिससे उनके परिवारों के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है।
कर्मचारियों ने मांग की कि उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल बंद कर संघर्ष समिति के साथ सार्थक संवाद शुरू किया जाए, अन्यथा पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
सभा को राजेंद्र सिंह, ई. एस. के. सिंह, अंकुर पांडेय, राजेश सिंह, पंकज यादव, मनोज जैसवाल, बंशीलाल, अरुण पटेल, आशुतोष राय सहित अन्य पदाधिकारियों ने संबोधित किया।




