फर्जी दस्तावेज बनाकर हड़पी जमीन, विरोध करने पर रेप केस में फंसाने की धमकी; चौबेपुर थाने में दर्ज हुआ केस
वाराणसी। जनपद में पुलिस महकमे से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें कोर्ट के आदेश पर एक सब-इंस्पेक्टर सहित पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि जमीन कब्जाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और शिकायत करने पर पीड़ित को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
चौबेपुर थाना क्षेत्र की चिरईगांव चौकी पर पूर्व में तैनात रहे सब-इंस्पेक्टर पंकज राय पर पीड़ित वीरेंद्र कुमार मौर्या ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि वर्ष 2013 में उन्होंने बाबूलाल से 2720 वर्ग फीट जमीन खरीदी थी, लेकिन बाद में लक्ष्मीना देवी, लालजी, उमाशंकर मिश्रा और पंकज कुमार मिश्रा ने कथित रूप से षड्यंत्र कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन पर कब्जा कर लिया।
आरोप है कि ₹100 के स्टाम्प पेपर पर फर्जी विक्रय पत्र और कलेक्ट्रेट की नकली मुहरों का उपयोग कर दस्तावेज बनाए गए। इतना ही नहीं, वर्ष 1979 का एक कथित सुलहनामा भी पेश किया गया, जिसमें ऐसे न्यायालय और पदनाम का उल्लेख था, जो वास्तविकता में बाद के वर्षों में अस्तित्व में आए।
पीड़ित के अनुसार, सूचना का अधिकार (RTI) के तहत दस्तावेज प्राप्त करने के बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर अपर नगर मजिस्ट्रेट (प्रथम) ने पूर्व में पारित एकपक्षीय आदेश को निरस्त कर दिया था।
इसके बावजूद आरोप है कि तत्कालीन चौकी इंचार्ज पंकज राय ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आरोपियों को संरक्षण देने का प्रयास किया। पीड़ित का दावा है कि उन्हें चौकी बुलाकर शिकायत वापस लेने के बदले आधी जमीन देने का प्रस्ताव दिया गया और इनकार करने पर उन्हें तथा उनके बेटों को रेप के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
इस मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (षष्ठम) के आदेश पर चौबेपुर थाने में लक्ष्मीना देवी, लालजी, उमाशंकर मिश्रा, पंकज कुमार मिश्रा और सब-इंस्पेक्टर पंकज राय के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, आरोपी दरोगा वर्तमान में लखनऊ में तैनात है। गंभीर धाराओं में दर्ज इस मामले में आगे की कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी को लेकर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।




