तहसील-कलेक्ट्रेट व दीवानी न्याय प्रणाली में भ्रष्टाचार के आरोप, हजारों पीड़ितों को न्याय न मिलने का दावा
रिपोर्ट अभिषेक उपाध्याय
जौनपुर। जनपद की विभिन्न तहसीलों में लंबित भूमि विवादों और कथित भ्रष्टाचार के विरोध में एक व्यक्ति आमरण अनशन पर बैठ गया है। अनशनकारी का आरोप है कि बैनामा होने के बावजूद वर्षों से जमीन पर कब्जा नहीं दिलाया जा रहा है तथा राजस्व व न्यायालयी तंत्र में सुनवाई नहीं हो रही।
बताया गया कि सदर, केराकत, शाहगंज, बदलापुर, मड़ियाहूं व मछलीशहर तहसीलों में प्रतिदिन लगभग दो हजार लोग अपने मामलों की सुनवाई के लिए चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन फाइलें न्याय पटल तक नहीं पहुंच पा रही हैं। इससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
अनशन पर बैठे नरेंद्र बहादुर सिंह, निवासी ग्राम राजेपुर द्वितीय त्रिमुहानी, का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2000 में चक संख्या 1243 की लगभग 14.7 एयर भूमि का बैनामा कराया था, लेकिन 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें कब्जा नहीं मिल सका।
उनका आरोप है कि दीवानी न्यायालय में करीब 20 वर्षों तक मुकदमा चला, जबकि सदर तहसील में मामला पिछले 6 वर्षों से लंबित है, फिर भी फाइल सुनवाई के लिए प्रस्तुत नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि ऐसे हजारों मामले हैं, जिनमें बैनामा लेने के बाद भी लोग जमीन पर कब्जा नहीं पा रहे। कई लोग मजबूरी में दोबारा बिक्री कर रहे हैं, जिससे स्टांप शुल्क तो जमा हो रहा है, लेकिन पीड़ितों को न्याय नहीं मिल रहा।
अनशनकारी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि लंबित भूमि विवादों की निष्पक्ष जांच कर त्वरित निस्तारण कराया जाए तथा राजस्व व न्यायालयी व्यवस्था में सुधार किया जाए। वहीं इस मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



